★सर्दी-ज़ुखाम,बुखार का रामबाण उपचार★सर्दी, जुकाम, बुखार, काली खाँसी,निमोनिया, फेफड़ों के इंफेक्शन, पीलिया,लिवर खराबी, बच्चों में बड़ी/छोटी माता (चेचक)बार बार बीमार होने जैसी बीमारियों में आप इस चमत्कारिक काढ़े का सेवन अवश्य करे । #नारायणवैधराज 6 ग्लास पानी लेकर आग पर रख दे। *उसमे नीचे लिखी सामग्री डाले* 1.गिलोय हरी 100 ग्राम 2.किसमिश 10 पीस 3.छुहारे 5 पीस 4.तुलसी पत्ते 50 पीस 5.पपीता पत्ता 1पीस 6.सोंठ 2 ग्राम (आधा चमच्च) 7.मुलेठी आधा चम्मच 8 काली मिर्च आधा चम्मच दालचीनी आधा चम्मच सभी सामग्री को तब तक उबाले जब तक आधा न रह जाए।सेवन विधि *200 ग्राम काढ़ा गर्म चाय की भांति उपयोग करे* *बच्चों को आधी मात्रा में दे।* 1 से 3 साल के बच्चों को 5 चमच्च एक बार मे दे दिन में 4 बार सिद्ध सर्दी नाशक काढ़े का इस्तेमाल करे। यह क्रिया 3 से 5 दिन लगातार करे। सभी प्रकार के वातरोग, वातदर्द, गठिया वात, wbc, जुकाम, खासी,चेचक, टाइफाइड औऱ किसी भी प्रकार की इंफेक्शन में कारगर है। नारायण वैधराज, बाबा Whats 8889013164 मोब. 9425026963
★ कमर दर्द का कारण और उपचार ★ कमर दर्द में मांसपेशी को हड्डी से जोड़ने वाले ऊतक (कंडरा) में खिंचाव या तनाव पैदा होता है . यह एक तरह का खिंचाव होता है जो अक्सर पीठ के निचले हिस्से में और जांघ के पिछले हिस्से की मांसपेशियों में होता है. जिस कारण कमर में हल्का या तेज दर्द लगातार बना रहता है। एलोपैथी दवा लेने पर कुछ आराम तो मिलता है पर पूर्ण आराम नही मिलता। अयुर्वेदिक उपचार ☑️ 200 अजवाइन में 10 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर भून लें। ठंडा होने पर। 1 -1 चम्मच सुबह शाम गर्म पानी से लेकर ऊपर से 200 ग्रा दूध पिएँ। 21 दिन उपयोग करे। आप बिलकुल ठीक हो जाएंगे। रोग मुताबिक 21 से ज्यादा भी उपयोग कर सकते हैं। दूसरा उपयोग ☑️ कुटकी 100 ग्राम, चिरैता 100 ग्राम अजवाइन 100 ग्राम,सोंठ भुनी 50 ग्राम,हिंग भुनी 50 ग्राम सभी को मिलाकर सुबह-शाम 1 -1चम्मच गर्म पानी से ले कर 200 ग्राम गर्म दूध पिये। यह उपयोग थोड़ी गर्मी कर सकता है। वो डरे नही। जब कमर दर्द ठीक हो जाए तो आप आँवला मुरब्बा सेवन कर सकते हैं। कमर दर्द की 100% कारगर दवा यह वातदर्द का कल्पचूर्ण आप हमसे ऑनलाइन मंगवा सकते है । https://wa.me/c/918889013164 नारायण वैधराज बाबा मोब. 8889013164
★सफ़ेद पानी (लकोरिया ) की दवा★श्वेत प्रदर या ल्यूकोरिआ या लिकोरिया (Leukorrhea) या "सफेद पानी आना" स्त्रिओं का एक रोग है जिसमें स्त्री-योनि से असामान्य मात्रा में सफेद रंग का गाढा और बदबूदार पानी निकलता है और जिसके कारण वे बहुत क्षीण तथा दुर्बल हो जाती है। महिलाओं में श्वेत प्रदर रोग आम बात है।ल्यूकोरिया स्त्री की योनि से जुड़ी एक बहुत ही सामान्य स्थिति है। योनि मार्ग से आने वाले सफेद और चिपचिपे गाढ़े स्राव को ल्यूकोरिया कहते हैं। कभी-कभी योनि से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने के लिए यह सामान्य होता है। लेकिन कई बार योनि से निकलते स्राव में ज़्यादा चिपचिपापन, जलन, खुजली, गंध होती है जिसके कारण यह ज़्यादा परेशानी का कारण बनता है।लिकोरिया होने के लक्षण :★पेट के निचले हिस्से और टांगो में दर्द रहना★बार बार पेशाब आना★योनी के आस पास खुजली होना★सम्भोग के दौरान दर्द महसूस होना★थकावट ज्यादा रहना★कब्ज़ होना★गर्भ न ठहरना★खाया पीया न लगना।★ शरीर का कमजोर होना।लकोरिया सफेद पानी की दवाकौंचबीज बीज 100 ग्रामआवला चुर्ण 100 ग्रामतुलसी बीज 100 ग्रामकीकर फली 100 ग्रामसतावरी 100 ग्रामसफेद मूसली 100 ग्राममिश्री 100 ग्राममुलहठी 50 ग्रामछोटी इलायची के बीज 25 ग्रामसभी को मिलाकर चुर्ण बनाए।कैसे सेवन करे।दिन में 3 बार 1-1चमच्च पानी से ले।कम से कम 21 दिन कोर्स करे।अगर पुराना लकोरिया रोग है तो 40 दिन कोर्स करे।साथ मे यह जरूर करेनीम पत्ती 200 ग्राम 100 ग्राम फिटकरी को 2 लीटरमें उबालकर कर बोतल में भर ले।दिन में 5 से 7 वार इस पानी से योनि की सफाई करे।यायोनी की साफ-सफाई का समुचित ध्यान रखें ।यूरिन करने के बाद पानी से साफ करें।सेक्स के समय कंडोम का प्रयोग करें।आप यह दवा हमसे online भी मंगवा सकते हैं।नारायण वैधराज मोब. 8889013164
सभी प्रकार के त्वचा संबंधित रोगों के लिए रामबाण उपचार -#नारायणवैधराजआंवलासार गंधक को गौमूत्र के अर्क में मिलाकर प्रतिदिन सुबह शाम लगायें। इससे दाद पूरी तरह से ठीक हो जाता है।शुद्ध किया हुआ आंवलासार गंधक एक रत्ती को 10 ग्राम गौमूत्र के अर्क के साथ 90 दिन लगातार पीने से समस्त चर्मरोगों में लाभ होता है।एक्जिमा (चर्म रोगों में लगाने का महत्व) :कालीमिर्च, मुरदाशंख, कलईवाला नौसादर 10-10 ग्राम लेकर बारीक पीस लें। अब इसमे घी मिलाकर एक्जिमा पर दिन में तीन बार लगाने से कुछ दिनों में यह जड़ से खत्म हो जायेगा।#नारायणवैधराजआंवलासार गंधक 50 ग्राम, राल 10 ग्राम, मोम (शहद वाला) 10 ग्राम, सिन्दूर शुद्ध 10 ग्राम। पहले गंधक को तिल के तेल में डालकर धीमी आंच पर गर्म करें। जब गन्धक तेल में घुल जाए तो उसमें सिन्दूर व अन्य दवायें पाउडर करके मिला दें। सिन्दूर का रंग काला होने तक इन्हे पकायें और आग से नीचे उतारकर गरम-गरम ही उसी बर्तन में घोंटकर मल्हम (पेस्ट) जैसा बना लें। यह मल्हम एग्जिमा, दाद, खाज, खुजली, अपरस आदि समस्त चर्मरोगों में लाभकारी है। सही होने तक दोनों टाइम लगायें।250 ग्राम सरसों का तेल लेकर लोहे की कढ़ाही में चढ़ा कर आग पर रख दे। जब तेल खूब उबलने लगे तब इसमें 50 ग्राम नीम की कोमल कोंपल (नयी पत्तिया) डाल दे। कोपलों के काले पड़ते ही कड़ाही को तुरंत नीचे उतार ले अन्यथा तेल में आग लग कर तेल जल सकता हैं। ठंडा होने पर तेल को छान कर बोतल में भर ले। दिन में चार बार एक्ज़िमा पर लगाये, कुछ ही दिनों में एक्ज़िमा नष्ट हो जायेगा। एक वर्ष तक लगते रहेंगे तो ये रोग दोबारा नहीं होगा।दाद, खाज, खुजली, एग्जिमा, अकौता, अपरस का मरहम :गन्धक 10 ग्राम, पारा 3 ग्राम, मस्टर 3 ग्राम, तूतिया 3 ग्राम, कबीला 15 ग्राम, रालकामा 15 ग्राम। इन सब को कूट-पीसकर कपड़छान करके एक शीशी में रख लें। दाद रोग में मिट्टी के तेल (केरोसीन) में लेप बनाकर लगाएँ, खाज में सरसों के तेल के साथ मिलाकर सुबह-शाम लगायें। अकौता एग्जिमा में नीम के तेल में मिलाकर लगायें। यह दवा 10 दिन में ही सभी चर्मरोगो में पूरा आराम देती है।चर्म रोग नाशक अर्क :शुद्ध आंवलासार गंधक, ब्रह्मदण्डी, पवार (चकौड़ा) के बीज, स्वर्णछीरी की जड़, भृंगराज का पंचांग, नीम के पत्ते, बाबची, पीपल की छाल, इन सभी को 100 -100 ग्राम की मात्रा में लेकर व 10 ग्राम छोटी इलायची जौ कुट कर शाम को 3 लीटर पानी में भिगो दें। सुबह इन सभी का अर्क निकाल लें।यह अर्क 10 ग्राम की मात्रा में सुबह खाली पेट मिश्री के साथ पीने से समस्त चर्म रोगों में लाभ करता है। इसके प्रयोग से खून शुद्ध होता है। इसके सेवन से चेहरे की झाइयाँ, आँखों के नीचे का कालापन, मुहासे, फुन्सियां, दाद, खाज, खुजली, अपरस, अकौता, कुष्ठ आदि समस्त चर्मरोगों में पूर्णतः लाभ होता है।रक्त शोधक :दिन में एक-दो चम्मच अलसी के बीजों के तेल का सेवन करना त्वचा के लिए काफी फायदेमंद होता है। बेहतर रहेगा कि इसका सेवन किसी अन्य आहार के साथ ही किया जाए। अलसी के तेल को कभी भी सेकना नहीं चाहिए।रीठे के छिलके के पाउडर में शहद मिलाकर चने के बराबर गोलियाँ बना लें। सुबह एक गोली अधबिलोई दही के साथ और शाम को पानी के साथ निगल लें। उपदंश, खाज, खुजली, पित्त, दाद और चम्बल के लिए पूर्ण लाभप्रद है।सिरस की छाल का पाउडर 6 ग्राम सुबह व शाम शहद के साथ 60 दिन सेवन करें। इससे सम्पूर्ण रक्तदोष सही होते हैं।अनन्तमूल, मुलहटी, सफेद मूसली, गोरखमुण्डी, रक्तचन्दन, शनाय और असगन्ध 100 -100 ग्राम तथा सौंफ, पीपल, इलायची, गुलाब के फूल 50 -50 ग्राम। सभी को जौकुट करके एक डिब्बे में भरकर रख लें। एक चम्मच 200 ग्राम पानी में धीमी आंच में पकाएं और जब पानी 50 ग्राम रह जाय तब उसे छानकर उसके दो भाग करके सुबह और शाम मिश्री मिलाकर पिये। यह क्वाथ रक्त विकार, उपदंश, सूजाक के उपद्रव, वातरक्त और कुष्ठरोग को दूर करता है।चार ग्राम चिरायता और चार ग्राम कुटकी लेकर शीशे या चीनी के बर्तन में 125 ग्राम पानी डालकर रात को उसमे भिगो दे और ऊपर से ढक कर रख दे। प्रात: काल रात को भिगोया हुआ चिरायता और कुटकी का पानी निथार कर कपडे से छान कर पी ले और पीने के बाद 3-4 घंटे तक कुछ नहीं खाए और उसी समय अगले दिन के लिए उसी पात्र में 125 ग्राम पानी डाले।इस प्रकार चार दिन तक वही चिरायता और कुटकी काम देंगे। तत्पश्चात उनको फेंककर नया चार चार ग्राम चिरायता और कुटकी डालकर भिगोये और चार चार दिन के बाद बदलते रहे। यह पानी लगातार दो चार सप्ताह पीने से एक्ज़िमा, फोड़े फुंसी आदि चर्म रोग नष्ट होते हैं, मुंहासे निकलना बंद होते हैं और रक्त साफ़ होता हैं।नारायण वैधराज बाबामोब.8889013164
गठिया बाय जोडों का दर्द कैलशियम की कमी साईटिका कमर का दर्द एवं सभी प्रकार के मांसपेशियों में होने वाले दर्द के लिए अचूक रामबाण उपचार ।मित्रों आज की भाग दौड भरी लाईफ में हम अपने खान-पान पर ध्यान नही दे पाते हैया षदूषित खान-पान की वजह सै हमे या तो हाथ पेरौ में सूजन या दर्द हौने लगता है जौ चहाकर भी ठीक नही होता है।इस प्रकार की समस्या के लिए मैं आपको एक ऐसा अचूक रामबाण आयुर्वेदिक योग बता रहा हूं जिसका उपयोग कर आप दर्द से राहत पा सकते हैं ।इस आयुर्वेदिक योग को घर पर बनाने की विधि एवं सामग्री इस प्रकार है -शुद्ध शिलाजित =06 gmसौंठ =20 gmअजवाइन =20 gmपूनॅनवा =50 gmगीलोय. =20gmदेशीबबूलफली =300 gmकुचला =06 gmमुक्ता पिष्टि =10 gmनर कूंदन =10 gmशुद्ध शंख भस्म =10 gmआमि हल्दी =15 gmउपरोक्त औषधि खूब खरल करके महीन चूर्ण बना लें।सुबह शाम सेवन करे।अगर आप यह औषधि को बनाने मे असमर्थ हैं ।तो आप हमसे शुद्ध भार में ले सकते हैं ।नोट : कितना भी पूराना दर्द हो ऐडी ले कर चोटी तक बिल्कुल सही हो जायगा ।अनुदान शुल्क - 1650 रुपया 15 दिन के लिये ।यह आयुर्वेदिक औषधि आपके घर तक सीधे कोरियर द्वारा पहुंचाई जाएगी इसे प्राप्त करने के लिए हमें कॉल करें।*नारायण वैधराज, हरदा*Phone 9425026963What's App- 8889013164